#नाम_का_असर

सोच समझकर रखिए अपने बच्चों के नाम।

#शब्दोंका_व्यक्तित्व_पर_प्रभाव

मनुष्य के जीवन पर उसके जन्म समयके ग्रहों की स्थिति, उसके मातापिता के संस्कार, घर का वातावरण, गुरुजनों के संस्कार व चरित्र, मित्र/संगति आदि का प्रभाव रहता है।
साथ ही उसके अपने नाम का प्रभाव भी रहता है।

अर्थहीन या खराब तरंगे/vibrations उत्पन्न करनेवाले नाम रखने से उसका बुरा प्रभाव बच्चों पर अवश्य ही पड़ता है।
इस बातको सही साबित करनेवाली तीन सत्य घटनाएं प्रस्तुत है।

◆सत्य घटना-१

तीन महीने पूर्व एक दंपति अपने बच्चे को लेकर मेरे पास आए।
उसकी हालत अत्यंत ही खराब थी।
वो बच्चा बिल्कुल ही स्थिर नहीं था।
वो लगातार इधर उधर घूम रहा था। कभी एक चीज उठता कभी दूसरी चीज।
उसकी आंखें चारों तरफ घूम रही थी।
वो लगातार उत्पात मचा रहा था। वो मुश्किल से 4-5 घण्टे की नींद कर पाता था।
मैंने उसका नाम पूछा।
उसका नाम था कृशिव!!!

मैंने पूछा ये कैसा नाम रख लिया? क्या अर्थ है इसका?
उसके पिता बोले हमें कृष्ण और शिव दोनों प्रिय है। इसीलिए कृष्ण का कृ लिया और शिव का शिव लिया और कृशिव नाम रख दिया!!

मैंने स्पष्ट शब्दों में कहा नाम बदल दीजिए, कृशिव से अच्छी तरंगे उत्पन्न नहीं हो रही।
बच्चे को थोड़ा हिल भी किया।
उसकी माताजी को प्राथमिक हिलिंग की विधि बताई।
एक सप्ताह बाद वे फिरसे मेरे पास आए। उनकी माता ने कहा कि वो 50% शांत हो गया है।

◆सत्य घटना-२

आज वो बच्चे की उम्र पांच साल है।
उसका नाम है कबीर...

उसका प्रथम नाम रखा गया था 'रुद्र'।
रुद्र नाम रखा है तो रौद्र स्वरूप तो दिखाएगा ही!
वो बच्चा इतना उत्पात मचाता की बात ही मत पूछो। आए दिन बीमार भी रहता था वो।
उसकी हर जिद पूरी करनी पड़ती।
वो रातको दो बजे ढोल पीटने को बोलता।
और, उनके पिता ढोल/नगाड़ा को पीटते तभी उनको शांति होती।
जूनागढ़ में ही किसी महात्माने उसका नाम बदलने को कहा।
मातापिता ने बात मानली और नाम रखा कबीर। थोड़े ही दिनों में वोह शांत हो गया। आज वो बिल्कुल ही स्वस्थ और तंदुरुस्त है। 

◆सत्य घटना-३

4-5 दिन पहले कुछ मित्र मेरे पास आए।
एक मित्र का बच्चा उसके मातापिता के हिसाबसे नोर्मल नहीं था, #hyperactive था। और इसलिए सात हजार रुपये देकर उसका #ब्रेन_मेपिंग कराया था। एक किताब जितना #ब्रेन_टेस्ट_रिपोर्ट लेकर आए थे।
हकीकत में उस बच्चे को कोई तकलीफ नहीं थी!!
उसके पेरेंट्स मानते थे कि उसके बच्चे में कोई गड़बड़ है और वे डॉक्टर्स के पास जाते रहते थे।

उसका नाम था कृदय...

मैंने उसको विस्तारपूर्वक नाम का असर और #बालमनोविज्ञान समजाया।
मैंने कृदय को कबीर नाम से पुकारना शुरू किया।
वो मेरे मित्र थे तो 2-3 घंटे मेरे यहाँ रुके और भोजन प्रसाद आदि ग्रहण किया।
इतनी देरमें वो बच्चा शांत हो गया था। उसमे अच्छा बदलाव आ रहा था।
एक तो यह #हिलिंग का असर था, दूसरा नाम का और तीसरा रक्षा कवच का।

आजकल,
लोग ग्लेमर की रोशनीमें अंधे होकर टीवी सीरियल से फ़िल्म से फैशन, कपड़े आदि को अपनाते है।
ऐसेमें कभी तो वे बीभत्स लगते है और कभी दयाजनक।

मुझे पता चला कि लोग अपने बच्चों के नाम भी उन कलाकारों के नाम पर रखते है जिसका कोई अर्थ नहीं होता।
कृपया अपने बच्चों के नाम ऐसे रखिए जो अर्थपूर्ण हो।
हमारी संस्कृत, हिन्दी और गुजराती भाषाएं बहोत ही समृद्ध है। उनमें से किसी विद्वान को पूछकर पवित्र और अर्थपूर्ण नाम दीजिए अपने लाडलों को।
◆और खास बात,
ये चीकू, बबलू, चिंटू, बकु,,,,,,, जैसे नाम तो बिल्कुल ही न दें। उसे एक ही नाम से पुकारे।
◆ नाम पुकारने से जो तरंगे उत्पन्न होती है उसका असर  स्पाइनल कॉर्ड में स्थित #vertribra / #कशेरुकाओं पर होता है जो कि #चेततंत्र का मूलभूत हिस्सा है।
हमारे बच्चों का वर्तमान और भविष्य सुखमय और समृद्ध बनाइए।

धन्यवाद। शुभकामनाएं।

-स्वामी मिलन
#Holistic_Therapist
Anandam yog science foundation junagadh gujarat

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