Posts

Showing posts from January, 2017

रोगो से मुक्ति पाए चलन ध्यान से |

Image
चलत ध्यान   WALKING MEDITATION   डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन,   आर्थराइटिस, अनिंद्रा, चमड़ी के रोग, कब्ज़, मोटापा, महिलाओं के रोग, अपच, गैस, पथरी आदि में लाभकारी। नमस्ते! हमारा शरीर ईश्वर की अद्भुत रचना है। उसे स्वस्थ बनाए रखना हमारा फ़र्ज़ है। आजकल सुविधाएं बढ़ गई है   ऐशोआराम बढ़ गए है परिश्रम( sweating) नहीं हो रहा।   यह मुख्य   कारन है रोग, दुःख, चिंता, असफलता का। अधिकतर रोग मनोदैहिक ( Psychosomatic) होते है। अगर शरीर और मन का तालमेल बिठा ले तो रोग दुःख आदि चुटकियों में दूर हो सकते है।ऐसी ही एक वॉकिंग मेडिटेशन की रामबाण   विधि प्रस्तुत है। ★ इस से जो लाभ होते हे वोह किसी भी योग या कसरत से नहीं होते विधी ■शुभारंभ करने के लिए कोई भी समय ठीक है। वैसे सूर्योदय से पेहले का समय उत्तम है। ■आरामदायक जूते और वस्त्र पहने। ■हो सके तो प्राकृतिक जगह को चुने। ■जब शुरुआत करे तब गहरी साँस के साथ मुस्कुराए और परमात्मा इष्ट के दिव्य स्वरूप का स्मरण करें। ■ मुख बंद रखकर मुस्कुराते हुए सात कदम तक साँस भरते जाए और शरीर का ध्यान करें...

योग का रहस्यमय ज्ञान

Image
   • योग का कहना है कि आज्ञाचक्र से एक निश्चित समय पर रोज़ एक द्रव पदार्थ विसर्जित होता है जिसे अमृतक्षरण कहते हैं। इसके फल स्वरुप मुख में लार बनती है और 'मध्यमा' वाणी' 'बैखरी वाणी' में परिवर्तित होकर मुख से शब्दों के रूप में उच्चारित होती है।(बैखरी वाणी के बिना कोई बोल नहीं सकता) उसी अमृततत्व से ह्रदय धड़कता है और उसीसे शरीर के स्वतंत्र तंत्रिका तंत्र अपना कार्य करते हैं। उस अमृत तत्व का मूल स्रोत है--'पीयूष ग्रंथि'। यह सोम चक्र की सीमा के अंतर्गत स्थित है। योगिगण आज्ञाचक्र की 'रुद्रग्रंथि' का भेदन कर नाभि ऊर्जा की सहायता से 'सोमचक्र' में स्थिति लाभ करते हैं और तदनन्तर उपलब्ध होते हैं अमृतत्व को जिसके फलस्वरूप उनके शरीर, मन, प्राण, मस्तिष्क आदि पर काल का प्रभाव अति मन्द (न के बराबर) गति से पड़ता है। वे दीर्घजीवी होते हैं और काल की सीमाओं का उल्लंघन कर सैकड़ों वर्ष पीछे अतीत में प्रवेश कर जाते हैं और इसी प्रकार सैकड़ों वर्ष आगे भविष्य में भी कर जाते हैं प्रवेश। इससे सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि अतीत के अँधेरे में डूबे ज्ञान-विज्ञान और उसके मूल...