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योग और प्राणिक हीलिंग के बारे में जानिए !!

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शरीर शक्ति, प्राण शक्ति, मन शक्ति और आत्म शक्ति के समन्वय से सर्वांगी समृद्ध जीवन अधिकतर मनुष्य अध्यात्म की शक्ति को नहीं जानते, अध्यात्म का विज्ञान नहीं जानते इसलिए दुःख में, अभाव में, चिंता में, भय में, ईर्ष्या में, रोग में, दरिद्रता में हाय हाय करते हुए जीवन समाप्त कर देते है। मात्र एक मनुष्य की आत्म शक्ति क्या चमत्कार कर सकती है इस बात से लोग अनजान है। योग और प्राणिक हीलिंग के युक्त उपयोग से मैंने लोगों के जीवन में परिवर्तन आते देखा है। ◆प्रवचन के अंश◆ ●आप सब अपनी फ़ोटो खिंच लो। हर सात दिन बात खींचो। और आप देखेंगे की चेहरा बदल रहा है। ●अपने पसीने की गंध के प्रति जाग्रत रहो। और आप अनुभव करेंगे की सुगंध बढ़ रही है। ●अपने शरीर, अपनी वाणी, अपने विचार और अपने भाव पर नियंत्रण कर के अपना सुंदर भविष्य खुद बनाओ। ●जाग्रत मन, अर्धजाग्रत मन और तीव्र जाग्रत मन की अनंत शक्तियों को जाग्रत करो। ●स्थूल शरीर, प्राण शरीर और मन शरीर को जाग्रत करो उसे पवित्र करो उसे रि-प्रोग्राम करो। ●जैसा स्वस्थ, सुडोल शरीर चाहते हो वैसा बनाओ। ●योग सायन्स और प्राण शक्ति से आप दूसरों के रोग भी...

जानिए कीस तरह आप केवल एक आसन से सभी रोगों से मुक्त हो सकते हे!

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आधुनिक हॉस्पिटल्स की संख्या बढ़ रही है।डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ रही है।फिर भी,रोग बीमारी बढ़ रहे है!!है ना आश्चर्य की बात!! क्यों?? क्योंकि लोग समजते है की रोग स्थूल शरीर में है। जब की यह सत्य नहीं है। 95% रोग सूक्ष्म शरीर में होते है। सूक्ष्म शरीर का संतुलन बिगड़ने से स्थूल शरीर रोगग्रस्त होता है। सूक्ष्म शरीर को ठीक कर दें तो स्थूल शरीर अपनेआप ठीक हो जाएगा। सूक्ष्म शरीर को ठीक करने सर्वोत्तम उपाय प्रस्तुत है। (वॉकिंग मेडिटेशन और हरड़े का प्रयोग भी साथ करें तो बेहतर परिणाम मिलेंगे। फ़ेसबुक:स्वामी मिलन) ●सवासन साथ सेल्फ हीलिंग● ज़मीन पर पतला गद्दा बिछा दें। पीठ के बल लेट जाए। पैरों के बिच डेढ़-दो फिट का अंतर रखें। दोनों हाथ कोहनी से सीधे, शरीर से दूर, हथेलियां खुली। गरदन का पिछला हिस्सा कवर हो जाए ऐसे एक पतला पिलो सर के निचे रखें। अच्छा संगीत, मंत्र धीमी आवाज़ में चलाए तो बेहतर। आँखे धीमे से बंद कर लें। चेहरे पर सुंदर हास्य sweet smile ले आएं। धीमे धीमे साँस लें... मस्तक से ले कर के पैरों के पंजे तक पुरे शरीर का ध्यान करें... धीमे धीमे साँस छोड़े... शरीर मन को...